Mayasabha Web Series Review – राजनीति के खेल की सच्ची झलक

हाल ही में Sony Liv पर एक नई वेब सीरीज़ आई है जिसका नाम है Mayasabha। ट्रेलर देखने के बाद से ही थोड़ी उत्सुकता थी, लेकिन असली वजह थी इसके डायरेक्टर Deva Katta। Deva Katta की 2021 में आई फिल्म रिपब्लिक देखने के बाद से मैं उनके काम का फैन बन गया था। और इस बार भी उन्होंने निराश नहीं किया।

Mayasabha में आदि पिनी शेट्टी, चैतन्य राव और साईं कुमार मुख्य भूमिकाओं में हैं। इनके साथ कई अन्य कलाकार भी कहानी में जान डालते हैं, लेकिन इन तीनों का स्क्रीन प्रेज़ेंस सबसे अलग और प्रभावशाली है।

Mayasabha की कहानी 

Mayasabha की कहानी भारत के एक प्रदेश की राजनीति के बड़े नेताओं से प्रेरित है, लेकिन आपको कही भी किसी का नाम सुनाई नहीं देगा। मेकर्स ने किसी का नाम सीधे नहीं लिया। मेकर्स ने असली घटनाओं को पूरी तरह कॉपी करने के बजाय उन्हें फ़िक्शनल टच दिया है, और कई हिस्सों को नए नज़रिये से दिखाया है।

राजनीति, जातिवाद और नक्सलवाद

Mayasabha की कहानी पूरी तरह रियलिस्टिक पॉलिटिकल ड्रामा है जिसमें फैंटेसी की कोई गुंजाइश नहीं है। कहानी में जातिवाद, नक्सलवाद और सत्ता के खेल को बेहद सटीक तरीके से दिखाया गया है।

जातिवाद वाले हिस्से में कई बार बिरादरी और जाति के नाम आते हैं। हो सकता है कुछ लोगों को लगे कि ये ज़्यादा हो रहा है, लेकिन यही असलियत है। राजनीति में जाति की भूमिका तब भी थी और आज भी है, और इसे सीरीज़ ने रियलिस्टिक तरीके से पेश किया है।

नक्सलवाद का एंगल भी काफ़ी दिलचस्प है। ये दिखाता है कि कैसे नक्सल आंदोलन ने एक प्रदेश की  राजनीति को प्रभावित किया और इसके पीछे किस तरह के कारण थे।

परफॉर्मेंस और कैरेक्टर डेवलपमेंट

आदि पिनी शेट्टी, चैतन्य राव और साईं कुमार—तीनों के किरदार अच्छी तरह लिखे गए हैं। कहानी में बहुत ही अच्छे तरीके से इनके पॉलिटिक्स में आने के कारण, इनकी सोच और इनके इरादे, सब कुछ साफ़-साफ़ बताया गया है।

आपको इनके बीच की बॉन्डिंग, बातचीत और पॉलिटिकल गेम्स देखने में मज़ा आएगा । बैकग्राउंड में कई सबप्लॉट भी चलते रहते हैं, जो कहानी को गहराई देते हैं। ये सबप्लॉट्स छोटे लगते हैं लेकिन पूरी सीरीज़ के फ्लो को बनाए रखते हैं और आपको कही से भी यह फील नहीं करवाते कि कहानी अपनी दिशा से भटक गई हो।

पहले एपिसोड से पकड़

मैंने बहुत से वेब सीरीज में ये पाया है कि उनकी असली कहानी 3–4 एपिसोड बाद शुरू होती है, लेकिन mayasabha आपको पहले ही एपिसोड से बांध लेती है। पहले ही एपिसोड से आपको पता चल जाता है कि आप एक सॉलिड पॉलिटिकल ड्रामा देखने जा रहे हैं। अंत में जो बड़ा ट्विस्ट आता है (में इसका स्पॉइलर नहीं देना चाहती ) वो अगले सीज़न के लिए उत्सुकता बढ़ा देता है।

टेक्निकल पहलू

mayasbha का सिनेमैटोग्राफी, बैकग्राउंड म्यूज़िक और सेट डिज़ाइन कहानी के साथ मेल खाता है।सेट डिज़ाइन पूरी तरह से ऑथेंटिक लुक प्रदान करता है इसमें  प्रदेश के राजनीतिक और ग्रामीण माहौल को प्रामाणिक तरीके से दिखाया गया है।

अगर आप इसे हिंदी में देख रहे है तो आपको हिंदी डबिंग का भी शानदार अनुभव होगा, मैंने कुछ हिस्से तेलुगु में और बाकी हिंदी में देखे—दोनों ही वर्ज़न में डायलॉग्स असरदार लगे। वॉइस आर्टिस्ट्स ने किरदारों के इमोशन्स को सही तरीके से पेश किया है, जिससे देखने का मज़ा दोगुना हो जाता है।

क्यों आपको महासभा देखनी चाहिए?

अगर आपको पॉलिटिकल ड्रामा पसंद है, जिसमें सिर्फ भाषण और रैलियां ही नहीं बल्कि राजनीति के असली खेल को दिखाया जाए, तो ये सीरीज़ आपके लिए है।ये न तो सिर्फ मनोरंजन है, न ही सिर्फ डॉक्यूमेंट्री—ये दोनों के बीच का सही संतुलन है—जहां आपको इमोशन भी मिलेगा, पॉलिटिकल थ्रिल भी और थोड़ा-बहुत एक्शन भी।

मेरी राय

माया सभा मुझे एक सॉलिड और इंगेजिंग सीरीज़ लगी। इसमें कहानी कहने का तरीका, किरदारों की परफॉर्मेंस और रियलिज़्म, तीनों ही बेहतरीन हैं। हाँ, कुछ जगहें हैं जहां कहानी थोड़ी प्रेडिक्टेबल हो जाती है, लेकिन इसके बावजूद ये आपको बांधे रखती है। सबसे बड़ी बात ये कि इसे देखते वक्त आपको लगेगा जैसे कोई पुराना दोस्त आपको बैठकर किसी प्रदेश की राजनीति के दिलचस्प किस्से सुना रहा हो।

अगर आपकी  राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं, तो शायद यह आपको न खींचे।

अगर आपने माया सभा देखी है, तो आपको कैसी लगी? नीचे कमेंट में ज़रूर बताइए।

डिस्क्लेमर: इस पोस्ट में दी गई जानकारी केवल मनोरंजन और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें व्यक्त की गई राय लेखक की व्यक्तिगत है। किसी भी व्यक्ति, ब्रांड या शो को आहत करने का इरादा नहीं है। सभी तस्वीरें/वीडियो/क्लिप्स उनके संबंधित मालिकों के कॉपीराइट में आते हैं। यह जानकारी विभिन्न ऑनलाइन/मीडिया सोर्स से ली गई है, हम इसकी सटीकता की गारंटी नहीं देते।”

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