पितृपक्ष 2025 हिन्दू धर्म का वह पवित्र काल है जिसमें हम अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। यह सिर्फ एक रस्म नहीं — यह हमारी कृतज्ञता, याद और पारिवारिक संस्कारों का प्रतीक है। यदि मृत्यु तिथि याद न हो तो पितृपक्ष 2025 की सर्वपितृ अमावस्या (21 सितंबर 2025) सर्वश्रेष्ठ दिन माना जाता है।
पितृपक्ष वही खास समय है, जब हर परिवार अपने पितरों (पूर्वजों) को याद करता है और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण करता है।यह सिर्फ एक धार्मिक कर्मकांड नहीं है, बल्कि भावनाओं से जुड़ा त्योहार है। इसे मानना हमारे संस्कार और कृतज्ञता का हिस्सा है।
यदि मृत्यु तिथि ज्ञात न हो तो श्राद्ध कब करें?
कई बार ऐसा होता है कि पुरानी पीढ़ी के निधन की सही तिथि परिवार को याद नहीं रहती। शास्त्रों में इसका भी समाधान बताया गया है। ऐसी स्थिति में सर्वपितृ अमावस्या का दिन सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। वर्ष 2025 में यह तिथि 21 सितंबर (रविवार) को पड़ेगी।
इस दिन किया गया श्राद्ध सभी पितरों तक पहुँचता है, चाहे उनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात हो या न हो। इसलिए इसे “सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या” भी कहा जाता है।
जाने :- https://en.wikipedia.org/wiki/Pitru_Paksha
श्राद्ध में क्या करना जरूरी है?
पितृपक्ष 2025 में श्राद्ध करते समय इन नियमों का पालन करें:-
1. पिंडदान, तर्पण और ब्राह्मण भोज:- श्राद्ध की तीन मुख्य विधियाँ होती हैं – पिंडदान, तर्पण और ब्राह्मण भोज। इनसे आत्मा को तृप्ति मिलती है और माना जाता है कि पितरों को मोक्ष का मार्ग प्राप्त होता है।
2. स्नान के बाद तर्पण:- सुबह स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल में काला तिल डालकर तर्पण करना चाहिए। दक्षिण दिशा को पितृलोक की दिशा कहा गया है।
3. सात्विक भोजन और पवित्रता:- पितृपक्ष में घर का वातावरण शुद्ध और शांत रखना चाहिए। खाना पूरी तरह सात्विक हो – बिना प्याज, लहसुन और तामसिक वस्तुओं के।
4. ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन:- श्राद्ध के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराना बहुत शुभ माना गया है। अगर ब्राह्मण उपलब्ध न हों तो गाय, कौए या किसी गरीब व जरूरतमंद को भोजन कराना भी उतना ही फलदायी है।
5. श्रद्धा और विनम्रता:- श्राद्ध करते समय मन पूरी तरह शांत और विनम्र होना चाहिए क्रोध, विवाद और दिखावे से दूर रहकर इसे श्रद्धा से करना सबसे जरूरी है।
पितृपक्ष 2025 में क्या न करें?
1. शुभ कार्यों से परहेज़:- पितृपक्ष के समय विवाह, गृह प्रवेश या नया व्यवसाय शुरू करना अशुभ माना जाता है। इन्हें पितृपक्ष के बाद करना ही शुभ होता है।
2. तामसिक भोजन का सेवन:- मांस, शराब, प्याज और लहसुन जैसी तामसिक वस्तुएँ इस समय वर्जित हैं। इन्हें खाने से श्राद्ध का पुण्य कम हो जाता है।
3. बाल और नाखून न काटें:- पितृपक्ष में बाल कटवाना और नाखून काटना अपवित्रता का कारण माना जाता है शास्त्रों के अनुसार यह पूर्वजों के प्रति अनादर का संकेत है।
4. मित्रों को भोज न कराएँ:- श्राद्ध का भोजन केवल ब्राह्मणों, गाय, कौए या जरूरतमंदों को ही दिया जाता है। मित्रों या रिश्तेदारों को भोज कराने से इसका महत्व कम हो जाता है।
पितृपक्ष 2025 के 7 शक्तिशाली उपाय (Remedies)
नीचे दिए ये उपाय शास्त्रीय और व्यवहारिक दोनों रूप से आमतौर पर सुझाए जाते हैं — पितृपक्ष 2025 में इन्हें ध्यान से अपनाने से पितृदोष शांति के प्रभाव बढ़ते हैं:
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विधिपूर्वक श्राद्ध और पिंडदान — सही सामग्री (चावल, जौ, तिल, घी) से पिंड बनाकर समर्पित करें
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नियत समय पर तर्पण — दक्षिण मुख करके जल-तिल-दूध अर्पित करें और मंत्रों का जाप करें।
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ब्राह्मण भोज और दक्षिणा — ब्राह्मणों को भोजन कराना और दक्षिणा देना पुण्यदायक है।
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दैनिक पीपल/तुलसी पूजा — पीपल या तुलसी के नीचे तिल, अक्षत और दूध अर्पित करना लाभदायक है।
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दक्षिण दिशा में दीपक जलाना — घर की दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
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मंत्र जाप — उदाहरण:
ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः;ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्। -
दान-पुण्य और सेवा — अनाथ, गरीब और जरूरतमंदों को भोजन व वस्त्र दान करें — इससे बहुत बड़ा पुण्य होता है।
क्या है पिंडदान, तर्पण और ब्राह्मण भोज का महत्व:- https://dailydosenews18.com/pinddan-tarpan-brahaman-bhoj-ka-mahatv/
क्यों जरूरी हैं ये नियम और वर्जनाएँ?
इन परंपराओं के पीछे गहरी आस्था और आध्यात्मिक महत्व छिपा है।
- सही विधि से किया गया श्राद्ध पितृदोष से मुक्ति दिलाता है।
- पूर्वज प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं।
- परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
- जीवन की कई बाधाएँ स्वतः दूर हो जाती हैं।
FAQs
प्रश्न 1: यदि पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो तो श्राद्ध कब करें?
उत्तर: ऐसी स्थिति में सर्वपितृ अमावस्या (21 सितंबर 2025) को श्राद्ध करना चाहिए।
प्रश्न 2: पितृपक्ष में कौन-कौन से काम नहीं करने चाहिए?
उत्तर: विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय, बाल कटवाना, नाखून काटना और तामसिक भोजन (मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन) वर्जित माने गए हैं।
प्रश्न 3: श्राद्ध में ब्राह्मण उपलब्ध न हों तो क्या करें?
उत्तर: ब्राह्मण न मिलने पर गाय, कौए या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना शुभ है।
प्रश्न 4: पितृपक्ष में रोज़ाना क्या करना चाहिए?
उत्तर: प्रतिदिन स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल में काला तिल डालकर तर्पण करना चाहिए।
प्रश्न 5: श्राद्ध करने से क्या लाभ मिलता है?
उत्तर: पूर्वजों की आत्मा तृप्त होती है, पितृदोष दूर होता है और परिवार को आशीर्वाद मिलता है।
निष्कर्ष
पितृपक्ष सिर्फ एक धार्मिक रीति नहीं है, यह हमारी भावनाओं और कृतज्ञता का प्रतीक है। अगर मृत्यु तिथि ज्ञात न हो तो सर्वपितृ अमावस्या (21 सितंबर 2025) को श्राद्ध करना सबसे उत्तम है।
साफ-सुथरे मन और सात्विक वातावरण में किया गया श्राद्ध न केवल पूर्वजों की आत्मा को शांति देता है, बल्कि परिवार को भी सुख-समृद्धि और आशीर्वाद प्रदान करता है।
