पितृपक्ष में पवित्र स्थान: 7 अद्भुत तीर्थ और शुभ कारण जहाँ श्राद्ध व पिंडदान का दिव्य महत्व है

पितृपक्ष में पवित्र स्थान: श्राद्ध और पिंडदान के प्रमुख तीर्थ

पितृपक्ष में पवित्र स्थान विशेष महत्व रखते हैं क्योंकि यही वे स्थल हैं जहाँ पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करना सबसे शुभ माना जाता है। हिंदू धर्म में पितृपक्ष का समय पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए समर्पित होता है। इस अवधि में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है

शास्त्रों में कहा गया है कि यदि ये कर्म पितृपक्ष में पवित्र तीर्थों पर किए जाएँ तो उनके फल कई गुना बढ़ जाते हैं। भारत में कई ऐसे तीर्थ हैं जहां पितृपक्ष के दौरान लाखों श्रद्धालु अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए जाते हैं। आइए जानते हैं इन प्रमुख पवित्र स्थानों के बारे में।

1. गया – पितरों का सबसे बड़ा तीर्थ

गया (बिहार) को पितृपक्ष पितृपक्ष में पवित्र स्थानों का सबसे बड़ा और प्रमुख तीर्थ माना जाता है।

  • यहां फल्गु नदी के तट पर पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • विष्णुपद मंदिर में पिंडदान और श्राद्ध का विशेष महत्व बताया गया है।
  • मान्यता है कि गया में श्राद्ध करने से सात पीढ़ियों के पितर तृप्त हो जाते हैं।
  • गया को मुक्तिधाम भी कहा जाता है, क्योंकि यहां श्राद्ध करने से आत्मा जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होती है।

 

हर साल पितृपक्ष में लाखों श्रद्धालु गया आते हैं और विधिपूर्वक पिंडदान करके अपने पितरों के लिए शांति की प्रार्थना करते हैं।

अधिक पढ़ें: https://en.wikipedia.org/wiki/Gaya,_India

2. हरिद्वार – हरि का द्वार

हरिद्वार को ‘हरि का द्वार’ कहा जाता है और इसे मोक्षदायिनी गंगा का पावन प्रवेशद्वार माना जाता है।

  • यहां हर की पौड़ी, कुशावर्त घाट, नारायण शिला और सावंत घाट पर श्राद्ध और पिंडदान का विशेष महत्व है।
  • नारायण शिला मंदिर में किए गए पिंडदान से पितरों को मोक्ष और परिवार को सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
  • गंगा तट पर किया गया तर्पण आत्मा को तृप्त कर देता है और पितृदोष का निवारण होता है। 

हरिद्वार पितृपक्ष में हजारों श्रद्धालुओं से भरा रहता है, जो यहां अपने पितरों की शांति के लिए पवित्र जल में तर्पण करते हैं।

3. वाराणसी (काशी) – मोक्ष की नगरी

वाराणसी, जिसे काशी कहा जाता है, भगवान शिव की नगरी मानी जाती है। यहां मृत्यु और मोक्ष का विशेष संबंध है। पितृपक्ष में पवित्र स्थानों में काशी का स्थान सर्वोच्च है

  • काशी में मणिकर्णिका घाट और पिशाचमोचन कुंड पितृकर्म के लिए प्रसिद्ध हैं
  • यहां श्राद्ध और पिंडदान करने से दिवंगत आत्मा को शिवलोक की प्राप्ति होती है।
  • मान्यता है कि काशी में किए गए श्राद्ध से पितर सीधे मोक्ष की ओर अग्रसर होते हैं। 

इसी कारण काशी को मोक्ष की नगरी भी कहा जाता है।

4. प्रयागराज – संगम का महत्व

गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम प्रयागराज को पितृपक्ष का पवित्र स्थान बनाता है

  • यहां संगम में स्नान करके तर्पण और पिंडदान करने से आत्मा जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाती है।
  • प्रयागराज में हर साल पितृपक्ष पर विशेष मेलों का आयोजन होता है जहां हजारों श्रद्धालु अपने पितरों के लिए पिंडदान करते हैं। 

शास्त्रों में संगम को देवताओं और पितरों की विशेष स्थली कहा गया है।

5. उज्जैन – शिप्रा नदी का पवित्र स्थल

मध्यप्रदेश स्थित उज्जैन भी पितृकर्म के लिए पवित्र माना गया है।

  • शिप्रा नदी के किनारे श्राद्ध और तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर का दर्शन करके पितरों की आत्मा को विशेष शांति मिलती है।

6. पुरी – जगन्नाथ धाम

ओडिशा का पुरी भी पितृकर्म के लिए शुभ स्थल माना जाता है।

  • यहां जगन्नाथ धाम के दर्शन और पवित्र समुद्र तट पर तर्पण करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है।
  • मान्यता है कि पुरी में श्राद्ध करने से परिवार में सुख-समृद्धि और सौभाग्य बढ़ता है। 

जाने श्राद्ध का महत्व और उससे मिलने वाले फल :-https://dailydosenews18.com/janiye-sharadh-ka-mahatv/

अन्य पवित्र स्थल

इन प्रमुख स्थलों के अलावा भी कई ऐसे तीर्थ हैं जहां पितृपक्ष के समय पिंडदान का विशेष महत्व माना जाता है:

  • नासिक (गोदावरी नदी)
  • गया के अलावा बोधगया क्षेत्र
  • पुष्कर (राजस्थान)
  • सिद्धपुर (गुजरात)

निष्कर्ष

पितृपक्ष में पवित्र स्थान केवल तीर्थ नहीं बल्कि पूर्वजों से जुड़ने का माध्यम हैं। इन स्थलों पर श्राद्ध और पिंडदान करने से आत्मा को शांति, मोक्ष और परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

इसलिए हर व्यक्ति को अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार इन तीर्थों पर जाकर अपने पितरों के लिए कर्म अवश्य करना चाहिए।

FAQ

Q1. पितृपक्ष में सबसे पवित्र स्थान कौन सा है?
गया (बिहार), जहाँ फल्गु नदी और विष्णुपद मंदिर है।

Q2. हरिद्वार में पिंडदान कहाँ करना चाहिए?
हर की पौड़ी, नारायण शिला और कुशावर्त घाट पर।

Q3. काशी में श्राद्ध का महत्व क्यों है?
यहाँ श्राद्ध करने से आत्मा शिवलोक को प्राप्त करती है।

Q4. प्रयागराज में पितृकर्म क्यों किया जाता है?
त्रिवेणी संगम पर श्राद्ध करने से जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है।

Q5. पितृपक्ष में अन्य पवित्र स्थान कौन से हैं?
उज्जैन, पुरी, नासिक, पुष्कर और सिद्धपुर।

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