पितृ तर्पण 2025:- भारतीय संस्कृति में श्रद्धा और संस्कार सबसे बड़ी धरोहर हैं। हम केवल अपने परिवार के जीवित सदस्यों का ही नहीं, बल्कि उन पूर्वजों का भी सम्मान करते हैं, जिनकी वजह से आज हमारी पहचान बनी है। पितरों के प्रति आभार प्रकट करने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका है – पितृ तर्पण।
तर्पण का अर्थ है अर्पण करना, यानी श्रद्धा और भक्ति से पितरों को जल, तिल और मंत्रों के माध्यम से स्मरण करना। यह सिर्फ धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि भावनाओं और कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है। शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है –
पितरों की संतुष्टि ही देवताओं की पूजा से पहले आवश्यक है।”

आइए जानते हैं – पितृ तर्पण का महत्व, इसे करने का सही समय, विधि, मंत्र और इससे मिलने वाले लाभ।
पितृ तर्पण 2025 का महत्व
पितृ तर्पण सिर्फ जल अर्पण नहीं है। यह एक ऐसा अवसर है जब हम अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनके प्रति आभार जताते हैं।
- जब हम श्रद्धा से तर्पण करते हैं तो माना जाता है कि पितर तृप्त होकर हमें आशीर्वाद देते हैं।
- तर्पण से पितृदोष दूर होता है और परिवार में शांति आती है।
- शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि अगर पितरों को प्रसन्न किया जाए तो देवता भी प्रसन्न होते हैं।
यही वजह है कि पितृपक्ष के 16 दिनों को बहुत खास माना जाता है।
जानें क्यों आपको पितृ पक्ष में श्राद्ध करना चाहिए https://dailydosenews18.com/pitru-paksha-shradh-importance-2025/
पितृ तर्पण 2025 का शुभ समय
दोपहर का समय सबसे उत्तम
सुबह स्नान और संकल्प के बाद, लगभग 11:30 बजे से 1:30 बजे तक का समय तर्पण के लिए सबसे अच्छा माना गया है।
कुतुप और रोहिणी मुहूर्त
- कुतुप मुहूर्त – लगभग 11:53 AM से 12:44 PM तक
- रोहिणी मुहूर्त – 12:44 PM से 1:34 PM तक
इन समयों में किया गया तर्पण विशेष फलदायी होता है।
सर्वपितृ अमावस्या का महत्व
अगर किसी को अपने पूर्वजों की सही मृत्यु तिथि ज्ञात न हो तो सर्वपितृ अमावस्या का दिन सबसे शुभ है। 2025 में यह तिथि 21 सितंबर (रविवार) को आएगी।
पितृ तर्पण के लिए पढ़े जाने वाले मंत्र
तर्पण सिर्फ जल अर्पण नहीं है, बल्कि मंत्रों के साथ किया गया संकल्प ही पितरों तक पहुँचता है। इसलिए सही मंत्रों का उच्चारण बहुत जरूरी है।
- कुछ प्रमुख मंत्र इस प्रकार हैं –
- ॐ पितृ गणाय विद्महे जगत धारिणये धीमहि तन्नो पितृ प्रचोदयात्
- ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः।।
- ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः
- ॐ सर्वपितृभ्यः स्वधा नमः
इन मंत्रों का उच्चारण करते समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल, तिल और दूध अर्पित करना चाहिए।
जानें https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%83_%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%B7
पितृ तर्पण 2025 की विधि
1. स्नान और शुद्धता:- सुबह स्नान करें और साफ-सुथरे, preferably सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहनें। वातावरण को शांत और पवित्र रखें।
2. संकल्प लें :-तांबे या पीतल के पात्र में जल, काला तिल, दूध, चावल और फूल रखें। फिर अपने पितरों का स्मरण करके संकल्प लें कि – “मैं अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण कर रहा हूँ।”
3. दक्षिण दिशा की ओर मुख :-पितरों की दिशा दक्षिण मानी जाती है। इसलिए तर्पण हमेशा दक्षिण की ओर मुख करके किया जाता है।
4. जल अर्पण :-घुटनों के बल बैठकर पात्र से जल तीन बार अर्पित करें और साथ में ऊपर बताए गए मंत्रों का जाप करें।
5. ब्राह्मण भोजन और दान :-तर्पण के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएँ और दक्षिणा दें। यदि ब्राह्मण उपलब्ध न हों तो गाय, कौए या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन अर्पित करना चाहिए।
पितृ तर्पण करते समय ध्यान रखने योग्य बातें
क्या करना चाहिए (Do’s)
- सात्विक भोजन ही बनाएं।
- पवित्रता और शांति का माहौल रखें।
- श्रद्धा और विनम्रता के साथ तर्पण करें।
क्या न करें (Don’ts)
- इस समय मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन न करें।
- पितृपक्ष के दौरान विवाह, गृह प्रवेश या नया काम शुरू न करें।
- बाल और नाखून काटने से बचें।
पितृ तर्पण से मिलने वाले लाभ
- पूर्वजों की आत्मा को शांति :-जल और मंत्रों से किया गया तर्पण पितरों को तृप्त करता है।
- पितृदोष से मुक्ति :-तर्पण करने से ज्योतिषीय दृष्टि से पितृदोष शांत होता है और जीवन की रुकावटें दूर होती हैं
- परिवार में सुख-शांति :-घर का वातावरण सकारात्मक होता है और परिवार के बीच सामंजस्य बना रहता है।
- धन और समृद्धि :- पितरों का आशीर्वाद मिलने से धन वृद्धि और समृद्धि होती है।
- संतान और स्वास्थ्य का आशीर्वाद :-संतान सुख और अच्छे स्वास्थ्य का लाभ मिलता है।
FAQs – पितृ तर्पण से जुड़े सामान्य प्रश्न
Q1. पितृ तर्पण का सही समय कब है?
दोपहर 11:30 बजे से 1:30 बजे तक का समय, विशेषकर कुतुप और रोहिणी मुहूर्त, सबसे शुभ माना गया है।
Q2. तर्पण करते समय कौन से मंत्र पढ़े जाते हैं?
“ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः” और “ॐ सर्वपितृभ्यः स्वधा नमः” प्रमुख मंत्र हैं।
Q3. तर्पण किस दिशा में करना चाहिए?
हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण करना चाहिए।
Q4. तर्पण न करने से क्या होता है?
तर्पण न करने से पितृदोष उत्पन्न होता है जिससे परिवार में अशांति, धन हानि और बाधाएं आ सकती हैं।
Q5. क्या पितृपक्ष में हर दिन तर्पण किया जा सकता है?
हाँ, पितृपक्ष के 16 दिन तर्पण किया जा सकता है, लेकिन सर्वपितृ अमावस्या का दिन सबसे महत्वपूर्ण है।