Arabia Kadali वेब सीरीज रिव्यू – क्या मछुआरों की ये कहानी आपका दिल छू पाएगी?

Arabia Kadali वेब सीरीज रिव्यू – समंदर के किनारे से जेल तक का सफर

जब पहली बार Arabia Kadali का नाम सुना, तो मन में एक तस्वीर बन गई – नावें, जाल, खारे पानी की खुशबू, और लहरों पर अपनी रोज़ी-रोटी कमाने वाले लोग। Amazon Prime Video पर रिलीज़ हुई ये तेलुगु वेब सीरीज मछुआरों के उसी संघर्ष की दास्तान है। अच्छी बात यह है कि इसका हिंदी डब भी मौजूद है, तो अगर तेलुगु आपकी भाषा नहीं भी है, तो भी आप इसे आसानी से देख सकते हैं।

कहानी का अंदाज़

Arabia Kadali की कहानी एक छोटे से मछुआरे गांव से शुरू होती है। कुछ दोस्त रोज़ की तरह मछली पकड़ने निकलते हैं, लेकिन किस्मत उन्हें एक ऐसे मोड़ पर ले आती है जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। लहरें और हवाएं उनका रास्ता बदल देती हैं, और देखते ही देखते वे पाकिस्तान के समुद्री इलाके में पहुंच जाते हैं।

वहां से उनकी मुश्किलें शुरू होती हैं – गिरफ्तारी, पूछताछ, और घर वापस आने की उम्मीद। कहानी सिर्फ मछली पकड़ने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह दोस्ती, डर, और उम्मीद की भी कहानी बन जाती है।

अगर आपने नागा चैतन्य की मूवी थंडेल देखी होंगी तो यह Arabia Kadali की कहानी आपको उसी का ही एक एक्सीलेंट वर्जन लगेंगी । मतलब जो कहानी वहां पर थी वही कहानी यहां पर है। हां, उस कहानी में कई सारी चीजें ओवर द टॉप थी और कुछ भी दिखा रहे थे। वह चीजें यहां पर कहीं ना कहीं थोड़ी कम देखने को मिलती है। 

किरदार जो याद रह जाते हैं

  • सत्यदेव – लीड रोल में उन्होंने मछुआरे का किरदार ऐसे निभाया है जैसे वो वाकई इसी गांव में पले-बढ़े हों। उनका बोलने का अंदाज़ और हावभाव पूरी तरह नेचुरल हैं।
  • बाकी कलाकार – दोस्तों के बीच की हंसी-मज़ाक वाली बातें कहानी को हल्का और रिलेटेबल बना देती हैं। हालांकि कुछ किरदारों को और गहराई मिलती, तो कहानी का असर और बढ़ सकता था। 

क्या बढ़िया लगा

  1. लोकेशन और सिनेमैटोग्राफी – असली लोकेशन पर शूट होने से सीरीज में एक रियल फील आता है।
  2. सत्यदेव की एक्टिंग – बिना ओवरड्रामे के, सच्चाई के साथ।
  3. कॉम्पैक्ट कहानी – लंबा खींचने की कोशिश नहीं की गई।
  4. हिंदी डबिंग – साफ और आसान, जिससे कहानी में डूबना आसान हो जाता है। 

क्या थोड़ा कमजोर रहा

  1. धीमी शुरुआत – पहले कुछ एपिसोड में धैर्य रखना पड़ेगा। जो इसका फर्स्ट हाफ है वो काफी स्लो है।
  2. भावनात्मक जुड़ाव की कमी – कुछ सीन गहरे असर डाल सकते थे, लेकिन वो पल थोड़े हल्के रह जाते हैं। मछुआरो के बारे में इतना गहराई से नहीं बताया गया 
  3. पुराने अंदाज़ का प्रेज़ेंटेशन – खासकर सीमा पार के किरदारों का चित्रण थोड़ा स्टेरियोटाइप्ड लगता है। 

मेरा अनुभव

मुझे यह सीरीज उस तरह की लगी जो शोर-शराबे वाले ड्रामों से हटकर है। इसमें कोई हाई-ऑक्टेन एक्शन नहीं, कोई बड़ी साजिश नहीं, बल्कि एक सीधी-सरल इंसानी कहानी है। ये आपको समंदर के किनारे ले जाएगी, नाव की हलचल और मछली पकड़ने की मेहनत महसूस कराएगी।

लेकिन सच कहूं तो इसमें वो “यादगार” वाला असर नहीं है, जो इसे बार-बार देखने का मन करे। हां, एक बार देखने लायक ज़रूर है, अगर आप सच्चाई के करीब की कहानियों में दिलचस्पी रखते हैं।

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डिस्क्लेमर: इस पोस्ट में दी गई जानकारी केवल मनोरंजन और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें व्यक्त की गई राय लेखक की व्यक्तिगत है। किसी भी व्यक्ति, ब्रांड या शो को आहत करने का इरादा नहीं है। सभी तस्वीरें/वीडियो/क्लिप्स उनके संबंधित मालिकों के कॉपीराइट में आते हैं। यह जानकारी विभिन्न ऑनलाइन/मीडिया सोर्स से ली गई है, हम इसकी सटीकता की गारंटी नहीं देते।”

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