Hello दोस्तों नमस्कार आज हम इस ब्लॉक पोस्ट के माध्यम से आपके साथ एक बार जरूरी विषय पर बात करना चाहते हैं जो है मौद्रिक नीति (Monetary Policy) आप सभी ने इस शब्द को जरुर सुना होगा और आज हम इस बारे में डिटेल में बात करेंगे। मैं कोशिश करूंगा कि आपको आसान शब्दों इसके बारे में समझा सकूं
परिचय — क्या है मौद्रिक नीति?
उदाहरण से समझिए — डिमांड और टाइम लायबिलिटी
RBI और CRR (कैश रिजर्व रेशियो) क्या होता है?
CRR अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करता है?
मॉनिटरी पॉलिसी के मुख्य पॉइंट्स – संक्षेप में
मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) और उसका रोल
परिचय — क्या है मौद्रिक नीति?
मौद्रिक नीति (Monetary Policy) एक ऐसी पॉलिसी होती है जिसके द्वारा आरबीआई भारतीय अर्थव्यवस्था में पैसे और उसके उधारी को कंट्रोल करता है
उदाहरण से समझिए — डिमांड और टाइम लायबिलिटी
इसी उदाहरण के जरिए समझने की कोशिश करते हैं;- मान लीजिये एक बैंक है ABC बैंक है जिनके बहुत सारे कस्टमर है पर अभी हम मौद्रिक नीति (Monetary Policy) को समझने के लिए मान लेते हैं कि इस बैंक के पास 3 कस्टमर है
- कस्टमर A जिन्होंने बैंक में जाकर ₹500000 की FD कर दिया 5 साल के लिए।
- कस्टमर B एक स्टूडेंट है जिसके पापा उसे हर महीने उसे खर्च के लिए पैसे ट्रांसफर करते हैं ₹10000 र
- कस्टमर C से एक व्यापारी है जिसके दिनभर के लेनदेन इसी बैंक में दर्ज होते है।
आगे बढ़ने से पहले हमें समझना पड़ेगा कि ये जो ऊपर बताये गए डिपॉजिट बैंक को मिले हैं वह किस टाइप के डिपाजिट है आइये पहले इसे समझते है
कस्टमर A, द्वारा बैंक में FD की गई है और यहां बैंक को 5 साल के बाद इंटरेस्ट के साथ देना पड़ेगा तो यह बैंक के लिए एक TIME लायबिलिटी हुई और आसान शब्दों में कहु तो एक निश्चित समय के लिए पैसा बैंक के पास जमा है इसको बैंक को उस समय पूरा होने के बाद देना पड़ेगा
कस्टमर B तथा कस्टमर C जमा किया गया पैसा वह कभी भी निकाल सकते हैं उसका कोई फिक्स टाइम नहीं है इसलिए उसे Demand लायबिलिटी कहते हैं । Demand लायबिलिटी अर्थात उनके मांगे पर बैंक को पैसा देना पड़ेगा
जब बैंक के पास ये दोनों तरह की राशि मिलती है, उसे कहा जाता है — नेट डिमांड और टाइम लायबिलिटी (NDTL)। अर्थात दोनों को नेट करके जो पैसा आया |
RBI और नकद रिजर्व रेशियो (CRR) का रोल
हर बैंक को उसके पास मौजूद नेट डिमांड और टाइम लायबिलिटी (NDTL) का कुछ हिस्सा रिजर्व बैंक के पास रखना पड़ता है ताकि हमेशा बैंक के पास कोई धनराशि की उपलब्धता बनी रहे ताकि जब भी कस्टमर पैसा निकालने जाए तुरंत तो उन्हें तुरंत पैसा मिल जाये।
आरबीआई के नियम के अनुसार जो भी बैंक का NDTL रहता है उसका 4.5% हिस्सा आरबीआई को जमा करना पड़ता है और इसे ही कहते हैं कैश रिजर्व रेशियो (CRR) यह जमा हर 14 दिन (फोर्टनाइटली) करना पड़ता है।
मतलब आपको समझ में आएगा कि बैंक के पास जितना भी एनडीएलटीडी आएगा उसका 4.5% कैश आरबीआई में जमा करना पड़ेगा या है
CRR अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करता है?
- जब आरबीआई द्वारा CRR को बढ़ा दिया जाता है तो उससे बैंकों के पास जो भी NDTL आएगा उसका ज्यादा परसेंट बैंक को आरबीआई के पास जमा करना पड़ेगा, जिसके कारण बैंक के पास लोन देने के लिए पैसे कम बचेगा,परिणाम स्वरुप बैंक लोन महंगा कर देगा –>> जब बैंक लोन महंगा करेगा तो लोग कम लोन लेंगे —>> कम लोन का मतलब लोगों के पास पैसा कम रहेगा —>> पैसा कम रहेगा तो लोग पैसा कम खर्च करेंगे इससे महंगाई इनफेक्शन कंट्रोल करने में मदद मिलती है
- जब आरबीआई द्वारा CRR को घटा दिया जाता है तो उससे बैंकों के पास जो भी NDTL आएगा उसका काम परसेंटेज बैंक को आरबीआई के पास जमा करना पड़ेगा, जिसके कारण बैंक के पास लोन देने के लिए अब ज्यादा पैसा बचेगा,परिणाम स्वरुप लोन सस्ता हो जायेगा –>> जब बैंक लोन सस्ता होगा तो लोग ज्यादा लोन लेंगे —>> ज्यादा लोन का मतलब लोगों के पास पैसा ज्यादा रहेगा —>> पैसा ज्यादा रहेगा तो लोग खर्च भी ज्यादा करेंगे इससे कंपनियों की भी डिमांड बढ़ेगी।
इस तरह आरबीआई सिर्फ CRR के माध्यम से अर्थव्यवस्था को कंट्रोल करने की कोशिश करता है मनी सप्लाई और इंट्रेस्ट रेट को नियंत्रित करके — इसे ही कहते हैं मॉनिटरी पॉलिसी।
मॉनिटरी पॉलिसी के मुख्य पॉइंट्स – संक्षेप में
- आसान शब्दों में कहें मॉनेटरी पॉलिसी वहां पॉलिसी होती है जिसके द्वारा आरबीआई अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों को तथा पैसे के फ्लो को कंट्रोल करता है
- डिमांड लायबिलिटी मतलब इस टाइप की लायबिलिटी जो बैंकों से कभी भी मांगी जा सकती है जिसका कोई निश्चित समय नहीं होता
- टाइम लायबिलिटी अर्थात वह लायबिलिटी जो बैंक को निश्चित समय के बाद भुगतान करना है
- CRR (कैश रिजर्व रेशियो) = NDTL का निर्धारित % जो आरबीआई के पास जमा करना होता है
- CRR बढ़ाने या घटाने से लोन, खर्च, और महँगाई पर असर पड़ता है।
उम्मीद करता हूँ आपको मॉनेटरी पॉलिसी के बारे में समझ में आया होगा
Disclaimer:-
यह आर्टिकल केवल शैक्षिक और जानकारी देने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी को निवेश सलाह न माना जाए। किसी भी तरह का निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइज़र या एक्सपर्ट से सलाह ज़रूर लें। अपनी व्यक्तिगत जानकारी सिर्फ आधिकारिक EPFO वेबसाइट या ऐप पर ही डालें