अगर आप वेब सीरीज के शौकीन हैं, तो आपने नोटिस किया होगा कि हर कुछ महीनों में एक नया स्पाई थ्रिलर आ ही जाता है। इस बार Jio Cinema ने Salakaar नाम से नया शो लॉन्च किया है। यह सीरीज़ भारत के एक सीक्रेट एजेंट की असली घटनाओं से प्रेरित है। इसमें सिर्फ 5 एपिसोड हैं, हर एक लगभग 30-35 मिनट का। मतलब, कुल तीन घंटे में आप पूरी सीरीज़ खत्म कर सकते हैं—एकदम परफेक्ट वीकेंड बिंज-वॉच।
कहानी की शुरुआत – भारत बनाम पाकिस्तान का पुराना खेल
Salakaar की कहानी हमें एक बार फिर उस फॉर्मूले पर ले जाती है जिसे हमने कई फिल्मों और वेब सीरीज में देखा है। पाकिस्तान एक खतरनाक मिशन पर है – वह एक न्यूक्लियर वेपन तैयार करना चाहता है। वहीं, भारत के जासूस और एजेंसियां उनके इस इरादे को नाकाम करने के लिए जुट जाती हैं।
इस सीरीज़ का मुख्य किरदार है अधीर, जो एक काल्पनिक जासूस है। कहानी की शुरुआत होती है पाकिस्तान के 1978 से, जहां जनरल ज़िया-उल-हक एक गुप्त न्यूक्लियर मिशन पर काम कर रहे हैं। अधीर का मिशन है—किसी भी कीमत पर इस प्रोजेक्ट को नाकाम करना।
लेकिन मज़ा यहीं खत्म नहीं होता। कहानी अचानक 2025 में छलांग लगाती है, जहां जनरल ज़िया का पोता अशफाक उल्लाह उसी अधूरे मिशन को पूरा करने के लिए निकल पड़ा है। इस बार भारत की तरफ से मैदान में उतरती है मोनी रॉय, एक अंडरकवर एजेंट, जिसका काम है अशफाक को रोकना।
स्टाइल और स्पीड – शो की सबसे बड़ी ताकत
Salakaar की सबसे खास बात इसकी रफ्तार है। आधे घंटे के एपिसोड इतने तेज़ी से चलते हैं कि आपको समय का अंदाज़ा ही नहीं लगता। एक्शन सीन्स स्मूद और अच्छे तरीके से शूट किए गए हैं, जिससे शो देखने में मज़ा आता है। डायरेक्शन में नीरज पांडे के काम का असर साफ झलकता है। कैमरा वर्क और सिनेमैटोग्राफी में अच्छी मेहनत दिखती है। कई सीन ऐसे हैं जो बड़े पर्दे की फिल्म जैसा अनुभव देते हैं।
कहानी में कमी – नयापन का अभाव
अगर आप सोच रहे हैं कि ये सीरीज़ आपको स्पेशल ऑप्स या द फैमिली मैन जैसा टाइट सस्पेंस देगी, तो थोड़ा रुक जाइए। यहां थ्रिल तो है, लेकिन ट्विस्ट ज्यादातर प्रेडिक्टेबल हैं। कई बार आपको लगेगा—”हाँ, ये तो होना ही था।” लेकिन फिर भी कैसे होगा, ये देखने में मज़ा आता है।
कलाकारों का प्रदर्शन
- नवीन कस्तूरिया – एक बिल्कुल नए अंदाज़ में नज़र आते हैं। उनकी एक्टिंग स्वाभाविक है और स्क्रीन पर उनका प्रेज़ेंस मजबूत है।कई सीन में उन्होंने अच्छा काम किया है, लेकिन कुछ जगह, खासकर गुस्से वाले सीन में, इमोशन उतना स्ट्रॉन्ग नहीं लगता
- मोनी रॉय – उनका रोल अच्छा था लेकिन स्क्रीन टाइम कम मिला। कैरेक्टर को ज्यादा डेप्थ नहीं दी गई, ज्यादातर वक्त वो टेंशन में ही नज़र आती हैं, लेकिन उन्होंने अपनी भूमिका के साथ न्याय किया।
- मुकेश ऋषि – निगेटिव रोल में शानदार। यह शो पूरी तरह उनके नाम रहा। पावरफुल स्क्रीन प्रेज़ेंस और दमदार एक्टिंग से उन्होंने हर सीन में जान डाल दी।
विज़ुअल्स और टेक्निकल क्वालिटी – टॉप क्लास
सीरीज़ के विजुअल्स इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं। 1978 के पाकिस्तान का पुराना माहौल हो या 2025 का हाई-टेक सेटअप—दोनों को बेहतरीन तरीके से दिखाया गया है। सिनेमेटोग्राफी और डायरेक्शन पर फुल मार्क्स मिलते हैं।बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी के साथ मेल खाता है, स्क्रीनप्ले टाइट है, बिना किसी फालतू सीन के। हर सीन का एक उद्देश्य है और दर्शकों की पकड़ बनी रहती है।
सीजन 2 की संभावना
पहले सीजन में कहानी पूरी तरह खत्म कर दी गई है, लेकिन अंत में एक छोटा हिंट दिया गया है जिससे लगता है कि सीजन 2 आ सकता है। अगर ऐसा होता है, तो उम्मीद है कि मेकर्स इस बार कुछ नया ट्विस्ट लाएंगे।
पारिवारिक दर्शकों के लिए उपयुक्तता
Salakaar में कोई बोल्ड या अश्लील सीन नहीं है। एक लिप-लॉक सीन है, लेकिन उसे भी साफ-सुथरे अंदाज़ में दिखाया गया है। इसलिए फैमिली के साथ भी इसे देखा जा सकता है।
फाइनल वर्डिक्ट
तीन घंटे की यह सीरीज़ आपको बोर नहीं करेगी, लेकिन ज़बरदस्त सस्पेंस की तलाश में हैं तो थोड़ा निराश भी कर सकती है।
अगर आप पहले से ही बहुत सारी स्पाई थ्रिलर्स देख चुके हैं, तो Salakaar का इम्पैक्ट आपके लिए थोड़ा हल्का रह सकता है। लेकिन अगर आप इस जॉनर में नए हैं, तो ये सीरीज़ आपको एंटरटेन करेगी और टाइम पास के लिए परफेक्ट है।
और ऐसे ही रिव्यु देखें
https://dailydosenews18.com/war-2-vs-kuli-box-office-clash/
https://dailydosenews18.com/arabia-kadali-web-series-review/
डिस्क्लेमर: इस पोस्ट में दी गई जानकारी केवल मनोरंजन और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें व्यक्त की गई राय लेखक की व्यक्तिगत है। किसी भी व्यक्ति, ब्रांड या शो को आहत करने का इरादा नहीं है। सभी तस्वीरें/वीडियो/क्लिप्स उनके संबंधित मालिकों के कॉपीराइट में आते हैं। यह जानकारी विभिन्न ऑनलाइन/मीडिया सोर्स से ली गई है, हम इसकी सटीकता की गारंटी नहीं देते।”